“एडूलीडर्स यूपी : उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में कार्यरत शिक्षकों का एक ऐसा मंच जो प्रदेश के युवा राष्ट्रपति पदक प्राप्त शिक्षक श्री सर्वेष्ट मिश्र के नेतृत्व में सभी 75 जनपदों में शिक्षकों द्वारा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास हेतु संचालित है जो शिक्षकों को आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें सीखने-सिखाने का मंच प्रदान कर उनकी “सफलता की कहानियों” का प्रकाशन कर ऐसे उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रतिवर्ष एडूलीडर्स यूपी अवार्ड प्रदान करता है। यह समूह प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत लाखों बच्चों के लर्निंग आउटकम सुनिश्चित करने हेतु गतिविधियों के निर्माण कर उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत “ग्लोबल सिटीजन” के रूप में तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
-टीम एडूलीडर्स यूपी

आज सम्मानित समाचार पत्र #दैनिक_जागरण ने देश के सभी संस्करणों में हमारे टीम के #एड़ूलीडर्स नवाचार के प्रयास को एक राष्ट्रीय स्टोरी के रूप में प्रकाशित किया है जो कि मेरे व मेरी टीम के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। आज यह समाचार देश के सभी जनपदों में एक साथ पढ़ा जा सकता है। यह सम्मान देने के लिए हम पूरी टीम एड़ूलीडर्स की तरह से दैनिक जागरण को हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करते हैं..! धन्यवाद।

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दैनिक जागरण – राष्ट्रीय समाचार

गोरखपुर के डॉ. सर्वेष्ट का व्हाट्सएप मॉडल बना मिसाल, रोजना यूपी के 20 लाख बच्चों तक पहुंच रहा रीडिंग मटेरियल

दैनिक जागरण समाचार पत्र की क्लिप: गोरखपुर के डॉ. सर्वेष्ट का व्हाट्सएप मॉडल बना मिसाल
  • डॉ. सर्वेष्ट मिश्र ने कोरोना काल में एडूलीडर्स की शुरुआत की।
  • 75 हजार शिक्षकों द्वारा 20 लाख बच्चों तक पहुंचती शैक्षिक सामग्री।
  • शिक्षकों को नवाचार और विविध शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराता है।

रजनीश त्रिपाठी, गोरखपुर। कोरोना काल में जब स्कूलों के दरवाजे बंद थे, डॉ. सर्वेष्ट मिश्र शिक्षा में नवाचार की बुनियाद रख रहे थे। परिचित शिक्षकों को जोड़कर उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जिसकी संख्या देखते-देखते एक हजार पहुंच गई। उद्देश्य केवल शिक्षकों का डिजिटल समूह बनाना नहीं, उनके नवाचार, अनुभव और उपयोगी शैक्षणिक सामग्री को एक-दूसरे तक पहुंचाना था। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शिक्षक जुड़े तो इस प्रयास को विस्तार मिला। उसी पहल का नाम ‘एडूलीडर्स’ है, जिसकी पठन-पाठन सामग्री आज हर सुबह 75 हजार शिक्षकों के माध्यम से 20 लाख बच्चों तक पहुंच रही है।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ. सर्वेष्ट एडूलीडर्स की व्याख्या शैक्षिक मागदर्शक के तौर पर करते हैं। शैक्षणिक सामग्री में होता क्या है? इस बारे में सर्वेष्ट उत्साहित होकर बताते हैं। आज का सुविचार, ज्ञान गंगा, हिंदी-इंग्लिश-संस्कृत शब्द, सामान्य अध्ययन, बूझ भाई बूझ, सुभाषितानि, योग प्रवाह, बाल सवाल और शब्द संग्रह जैसी सामग्री छात्रों में नैतिक मूल्यों के साथ समग्र विकास में सहायक है। मार्निंग सर्किल टाइम, स्वतंत्र खेल, भाषा एवं साक्षरता कौशल, कला, गणित और खेल से जुड़ी गतिविधियों के संबंधित सुझाव शिक्षकों के लिए जरूरी है।

पूरी सामग्री मुख्य एडमिन के ग्रुप में पोस्ट हो जाती है। इसके बाद जिलों के ग्रुप एडमिन इसे अपने जिले के ग्रुप में भेजते हैं। यह सामग्री एडूलीडर्स के फेसबुक पेज, कुटुंब एप और एक्स (ट्विटर) जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर भी रहती है।

डॉ. सर्वेष्ट के दावे पर शिक्षक भी मुहर लगाते हैं। झांसी के बड़ा गांव ब्लाक स्थित कोट प्राथमिक विद्यालय की शिक्षका डा. सुमन, सुभाषितानि को बच्चों में नैतिक मूल्य विकसित करने का उपयोगी माध्यम बताती हैं। शिक्षा में नवाचार के लिए शिक्षकों को प्रतिवर्ष एडूलीडर्स अवार्ड भी दिए जाते हैं।

राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से भी मिली है सराहना

आदर्श प्राथमिक विद्यालय मूड़घाट में प्रधानाध्यापक डॉ. सर्वेष्ट मिश्र को वर्ष 2018 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके कार्यों की सराहना कर चुके हैं। वर्तमान में डा. सर्वेष्ट उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बेसिक शिक्षा स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य हैं। वह राज्य माड्यूल लेखन और राज्य आकलन समूह से भी जुड़े हैं। प्री-प्राइमरी शिक्षा संचालन समिति के सदस्य होने के साथ ही बस्ती में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला समन्वयक भी हैं।

क्या कहता है नंबर गेम?

  • 75 जिलों में बना एडूलीडर्स ग्रुप, सबके अलग एडमिन
  • 1000 शिक्षक हैं हर जिले के ग्रुप में
  • 30 हजार लोग जुड़े हैं कुटुंब एप में
  • 6 हजार से अधिक है इंटरनेट मीडिया पर फालोवर
  • 5 बजे सुबह तक पहुंच जाती है पठन-पाठन सामग्री

 

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